श्री एस.जे. संजय का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। वे एक शिक्षाविद् के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सर गणेश दत्त पाटलिपुत्र हाई स्कूल से पूरी की और इसके पश्चात पटना विश्वविद्यालय के वाणिज्य महाविद्यालय से ऑनर्स की डिग्री अर्जित की। तदुपरांत वे दिल्ली चले गए, जहाँ उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की और वहीं अपनी वकालत आरंभ की। एक वर्ष के भीतर वे पटना लौट आए और पटना उच्च न्यायालय में वकालत प्रारंभ की।
वर्ष 1989 में उन्होंने अपने स्वतंत्र चैंबर की स्थापना की, जिसमें वे संवैधानिक विधि, सिविल, आपराधिक तथा कराधान विधि में विशेषज्ञता रखते थे, और कुछ ही वर्षों में उन्होंने पटना में एक सफल वकालत स्थापित कर ली। पटना उच्च न्यायालय के सर्वाधिक प्रतिष्ठित चैंबर्स में से एक का नेतृत्व करते हुए, अनेक कॉर्पोरेट घरानों ने उन्हें पटना उच्च न्यायालय, झारखंड उच्च न्यायालय, कलकत्ता उच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय तथा भारत के उच्चतम न्यायालय में अपना प्रतिनिधित्व करने हेतु नियुक्त किया। अपनी वकालत के दौरान उन्हें भारत की अनेक प्रख्यात विधि-हस्तियों के साथ तथा उनके विरुद्ध पैरवी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
वर्ष 2010 में श्री संजय को बिहार राज्य का अपर महाधिवक्ता नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 2014 तक रहे। वर्ष 2013 में पटना उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ द्वारा उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। जनवरी 2014 में उन्होंने अपर महाधिवक्ता पद से त्यागपत्र दे दिया और निजी वकालत में लौट आए।
अप्रैल 2015 में भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें पटना उच्च न्यायालय में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने हेतु भारत का अपर सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया। इस पद पर रहते हुए वे बिहार और झारखंड में भारत संघ के मुकदमों के समय प्रभारी रहे। वे जुलाई 2020 तक इस पद पर बने रहे। इसके बाद वे पुनः निजी प्रैक्टिस में आ गए एवं जल्द ही देश के व्यस्त वकीलों में उनका शुमार हो गया।
सितंबर 2024 में श्री संजय को उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली के लिए भारत का अपर सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया — जो बार में उनकी प्रतिष्ठा तथा विधि के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव की स्वीकृति है। उन्हें उच्चतम न्यायालय तथा देशभर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में भारत सरकार की ओर से अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी करने का गौरव प्राप्त है। वर्तमान में, वे जघन्य अपराधों के त्वरित विचारण हेतु देशभर में विशेष न्यायालयों की स्थापना से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित उस समिति के संयोजक भी हैं, जो लापता बच्चों तथा मानव तस्करी के संबंध में देशभर में लागू की जाने वाली एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने हेतु सभी राज्यों के साथ समन्वय कर रही है। इसके अतिरिक्त न्यायालय द्वारा नियुक्त “स्टॉक विटनेस” समिति के भी संयोजक हैं।
श्री सत्यदर्शी संजय दीर्घकाल से विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। वे दृष्टि देहदान समिति से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं — यह संगठन नेत्रदान, अंगदान तथा देहदान के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु समर्पित है और लोगों को इस उद्देश्य के लिए संकल्प लेने हेतु प्रेरित करता है। वे भारत विकास विकलांग न्यास से भी जुड़े हुए हैं, जो पटना में दिव्यांगजनों के लिए एक अस्पताल का संचालन करता है।
पारिवारिक दृष्टि से पत्नी श्रीमती सुशीला अग्रवाल भी एक अधिवक्ता हैं। उनकी पुत्री आकांक्षा तथा दामाद डॉ. सिद्धार्थ चौधरी संयुक्त राज्य अमेरिका की सिलिकॉन वैली में रहते हैं, जबकि उनके पुत्र अक्षत तथा पुत्रवधू दिशा भारत के उच्चतम न्यायालय में कार्यरत अधिवक्ता हैं। उनकी सफलता में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्हें दिनांक 18.06.2026 के प्रभाव से बिहार सरकार ने बिहार का महाधिवक्ता नियुक्त किया है।